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महिलाओं के स्वावलंबन से होगा भारत का सशक्तिकरण

सहकार भारती का दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला अधिवेशन नागपुर की पवित्र भूमि रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर में 1 और 2 फरवरी 2020 को सम्पन्न हुआ। अधिवेशन का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की राज्यपाल श्रीमती अनुसूया उइके एवं सहकार भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भारत माता एवं श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार के चित्रों पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर किया तो वहीं समापन केंद्रीय मंत्री श्री नितीन गडकरी के प्रेरक व उत्साहित संबोधन से हुआ। इस अधिवेशन में देश के भिन्न-भिन्न प्रान्तों में सहकारिता व स्व-सहायता समूहों के द्वारा अपने अपने क्षेत्रों में कार्य कर रहीं 25 प्रदेशों से लगभग 1500 महिलाओं ने भाग लिया। ज्ञात हो कि यह महिलाओं का दूसरा अधिवेशन था। इसके पूर्व भिलाई में संपन्न हुआ था। महिलाओं का यह सम्मेलन अब हर तीन वर्ष में आयोजित किया जाएगा।

नागपूर : राष्ट्रीय महिला अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर देशभर से आई मातृशक्ति को संबोधित करते हुये छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसूया उइके ने कहा कि मैं सहकार भारती के राष्ट्रीय महिला अधिवेशन में शामिल होकर गौरवान्वित हूँ, मुझे भी संगठन के माध्यम से बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आप सभी में मानवीय संवेदनाएं हैं तभी आप सहकार भारती से जुड़कर समाज कार्य और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये कार्य कर रही हैं। इनामदार जी के समर्पण और त्याग से हम सभी प्रेरित होते हैं। उन्होंने बिना सहकार – नही उद्धार को चरितार्थ कर देश की सहकारिता को दिशा दी। महिलाओं को सहयोग की आवश्यकता है वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं सहकार भारती उन्हें सहयोग प्रदान कर सशक्त बनाने के काम में लगी हैं। देश में सहकार भारती ने स्वयं सेवी समूहों के माध्यम से माता बहनों के सशक्तिकरण का काम किया है जो अनवरत जारी है। महिलाओं के अंदर ईश्वर ने स्वाभाविक गुण दिये हैं जो सहकारिता के लिये आवश्यक हैं। आप सभी में नम्रता, धैर्य, समर्पण है जिसके माध्यम से सहकारिता और अधिक आगे बढ़ेगी। मैंने कभी नही सोचा था कि एक दिन मैं राज्यपाल बनूंगी लेकिन नि:स्वार्थ समाज कार्य करते हुये यहाँ तक आई हूं। आप शोषित पीड़ितों की मदद करिए, उन्हें स्वावलंबी बनाइये। आपका काम सार्थक हो जायेगा जो कि सहकार भारती की मूल भावना है। आज जो बहनें सेवा कर रही हैं मुझे विश्वास है कल वो सम्मान की हकदार होंगी।

समापन सत्र में संबोधित करते हुये केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने कहा कि आज मुझे ये देखकर खुशी हो रही है कि देशभर की महिलाएं जो सहकारिता से जुड़कर समाज कार्य कर रही हैं वे सब यहाँ एकत्रित हुई हैं उन्होंने देश में सहकारिता व लघु सूक्ष्म उद्योगों की उपयोगिता को बताते हुए कहा कि हमारे देश के विकास में 29 प्रतिशत योगदान छोटे उद्योगों का है। आज 11 करोड़ नौकरी इसी क्षेत्र के माध्यम से दी जा रही हैं अब हमारा लक्ष्य इसे दोगुना करने का है जो कि सहकारिता के बिना संम्भव नही है। उदाहरण देते हुये कहा कि हमें उद्यमशीलता के गुण को विकसित करना चाहिए आज का समय टेक्नोलॉजी का है लेकिन इसके साथ धैर्य, निष्ठा और ईमानदारी भी बहुत आवश्यक है, जो कि आप सहकार भारती से जुड़कर सीख रहे हैं। सर्वे के आधार पर उन्होंने बताया कि जहाँ शहद का उत्पादन होता है वहां कृषि का 25% अधिक उत्पादन होता है अब इसके माध्यम से भी किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य लिया है। छोटे व्यवसाय में भी अच्छी गुणवत्ता, समय पर उपलब्धता व पैकेजिंग बहुत महत्वपूर्ण हैं इन्हें आपने ठीक कर लिया तो आप उद्यममशील हो जाएंगे। आप का कार्य समाजहित में है जो सिर्फ आपको ही नही, वंचित शोषितों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। भारतीय नारी का स्वावलंबन हो यही सहकार भारती का उद्देश्य है। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी तो देश व समाज आगे बढ़ेगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश वैद्य ने कहा कि नारी तो खुद ही शक्ति का रूप है वो जो चाहे कर सकती है। आपके सशक्त होने से देश भी मजबूत होगा। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि घर की महिला के कारण आर्थिक मंदी का असर देश मे नहीं होता क्योंकि वो घर चलाना जानती है। आप सहकरिता से जुड़कर स्वयं भी सशक्त बनो और देश को सशक्त बनाओ। हम विश्व गुरू की और आगे बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर सहकार भारती के संरक्षक और भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक सतीश मराठे ने कहा कि हमारा देश गौरव, वैभवशाली है, आबादी भी बहुत है। हमें अमेरिका नहीं बनना है। हमें अपने राष्ट्र को सशक्त और मजबूत बनाना है जो कि सहकारिता के बिना संभव नही है। जब गांव गांव में सेल्फ हेल्फ़ ग्रुप होंगे तो गांव की उन्नति होगी और हमारा लक्ष्य पूर्ण होगा उन्होंने आव्हान किया कि सहकारिता के माध्यम से देश को सशक्त बनाने में सहभागी बनें महिलायें।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री संजय पाचपोर ने महिला शक्ति को देश का आधार स्तंभ बताते हुये कहा कि महिलाओं के बिना सहकारिता की कल्पना अधूरी है। महिलायें तो अपने परिवार में सहकारिता का प्रतिबिंब हैं। आज यदि देश की महिला स्वावलंबी होगी तो हर घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और देश आर्थिक रूप से सशक्त होगा। उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति से आव्हान किया की महिलायें सहकारिता के माध्यम से क्रांति ला सकती हैं। गांव का विकास, सामाजिक समरसता, गरीबी मिटाना, रोजगार देना सहकारिता से संभव है। उन्होंने विश्‍वास दिलाया कि आप आगे बढिये बिना हार जीत की चिंता करे सोसाइटियों के चुनावों में महिला शक्ति का अहसास कराईये। सहकार भारती आपके साथ है।
राष्ट्रीय महिला प्रमुख शताब्दी पांडेय ने प्रस्तावना रखते हुये कहा कि हमारे देश मे सहकारिता की संकल्पना रही है। अब हमें गांव गांव में पुनः सहकारिता की अलख जगाना है। इनामदार जी ने अंतिम व्यक्ति के उत्थान का मार्ग सहकारिता माना था। अब हमें उसी मार्ग पर चलकर सभी का सहयोग करते हुये आगे बढ़ना है। आज 40 वर्षों में देश के 27 राज्य के 400 जिलों तक सहकार भारती पहुंची है।
संस्कारित सहकारिता हमारा उद्देश्य है। यह आर्थिक उद्यम के साथ आर्थिक सेवा भी है। शशिताई वंजारी ने शिक्षा पर जोर देते हुये कहा कि सहकार हमारा जीवन मूल्य है हमें आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और अर्थ के साथ सहकारिता से जोड़ना है। यह अधिवेशन हमारे लिए गौरव का विषय है हमें सहकार भारती के मन्त्र अनुसार संस्कारित सहकारिता खड़ी करना है, जो महिलायें बहुत अच्छे से कर सकती है।
ये रहे प्रमुख वक्ता और अतिथि-
दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला अधिवेशन में कई सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें विषय विशेषज्ञों ने सहकारिता की आवश्यकता और बारीकियों को बताया। इसमें प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ की राज्यपाल श्रीमती अनुसूया उइके, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री एवं नागपुर के सांसद श्री नितीन गडकरी, सहकार भारती राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश वैद्य, राष्ट्रीय महामंत्री श्री उदय जोशी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री संजय पाचपौर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री डी. एन. ठाकुर, एसएनडीटी विश्वविद्यालय मुंबई की कुलपति डॉ. शशिताई वंजारी, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताक्काताई, डॉ. मनीषा कोठेकर, श्री सुधाकर कुलकर्णी, श्रीमती मधुबाला साबू, वैम्निकोम पुणे के प्रो़फेसर डॉ डी.वी. देशपांडे एवं लघु सूक्ष्म उद्योग विभाग नागपुर के डायरेक्टर श्री प्रशांत पार्लेवर एवं सहकार भारती की राष्ट्रीय महिला प्रमुख श्रीमती शताब्दी पांडेय सहित अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भारत में सहकारिता एवं स्व-सहायता समूहों की उपयोगिता और आवयश्कता पर प्रकाश डाला।
सहकारिता का संकल्प दोहराया-
अधिवेशन में शुभारंभ सत्र के पूर्व उपस्थित मातृशक्ति ने सहकारिता के प्रतीक सतरंगी ध्वज को फहराया। तत्पश्चात सभी ने सहकारिता को आगे बढ़ाते हुए समाज व देश में सहकारिता के माध्यम से शोषित पीड़ितों को स्वावलंबी और गरीबी को दूर कर देशहित में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए सहकारिता के द्वारा देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र-
अधिवेशन स्थल पर लगी प्रदर्शनी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही क्योंकि देश भर के भिन्न भिन्न प्रांतों के स्व-सहायता समूहों के द्वारा निर्मित वस्तुओं के 50 से अधिक स्टॉल लगाए गये थे। जिसमें हस्तकलाओं से बनी हुई वस्तुएं, कपड़े, अचार, पापड़ व पारंपरिक कलाओं से निर्मित उत्पाद शामिल थे, जो वर्तमान में सहकारिता की आवश्यकता और उद्यमशीलता को प्रकट कर रहे थे।

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