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पुणे : हाल ही में श्रद्धेय स्व. लक्ष्मणराव इनामदार जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में पुणे में ‘संस्कारित सहकारिता से राष्ट्र का निर्माण’ इस विषय पर सहकार भारती महिला विभाग राष्ट्रीय टीम द्वारा दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस में आठ राज्यों से 30 महिला पदाधिकारी, प्रतिनिधि शामिल थे। इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय महिला अधिवेशन का आयोजन, महिला संगठन इन विषयों पर चर्चा हुई।

SB Pune Mahila Vibhag

सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. उदयराव जोशी, सहकार भारती के राष्ट्रीय सगठनमंत्री विजय देवांगन, पुणे महानगर अध्यक्ष प्रकाश गोरे, प्रदेश सचिव विनय खटावकर, राष्ट्रीय महिला आघाडी सहप्रमुख सुजाता खटावकर,  दुर्गा महिला साख संस्था की अध्यक्ष आशाताई देशपांडे, सहकार सुगंध मासिक पत्रिका के संपादक तथा सहकार भारती के प्रचार व प्रसार प्रमुख भालचंद्र कुलकर्णी, पश्‍चिम महाराष्ट्र प्रांत संघटक अनिल वळसंगकर आदि मान्यवर सभामंच पर उपस्थित थे।

डॉ. उदयराव जोशी जी ने सहकार क्षेत्र की व्यापकता स्पष्ट करते हुए सहकारिता कानून की शुरुआत, उस में सुधार की आवश्यकता विस्तार से बताई। श्रद्धेय स्व. लक्ष्मणराव इनामदार जी के प्रेरणा से स्थापित हुई सहकार भारती संस्था के मूल्यवर्धित अर्थात संस्कारित सहकारिता कार्यक्रम का अर्थ स्पष्ट किया। श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार जी के आदेशानुसार कार्यकर्ताओं का संस्कारित, प्रशिक्षित और सहकारिता के प्रति निष्ठावान होना अनिवार्य हैं। इस कड़ी आचारसंहिता के आधार पर सहकार भारती सहकारिता क्षेत्र में अपना उत्तरदायित्व निभा रही हैं। फिर भी पिछले कई सालों से राजकीय दबाव के कारण गलत तरीके आजमाए जा रहे हैं। और यह क्षेत्र बदनाम हो रहा है। इस का शुद्धीकरण करना यह सहकार भारती का एक मुख्य उद्देश्य है। शासन की ओर से सहकारिता को बढ़ावा देने के बजाय सहकारिता पर नियंत्रण रखने की जो कोशिश हो रही है; वह हम कतई सहन नही करेंगे इस  बात का उन्होंने जोरदार प्रतिपादन किया।

सहकारिता क्षेत्र की विशालता बताकर भारतीय समृद्धि का पुनरागमन सहकारिता के अस्तित्व में ही है, यह कहकर विजय देवांगन जी ने कहा कि, सहकारिता का दूसरा नाम संस्कार ही है। सब ने मिलजुल कर काम करना सहकारिता  है। सहकारिता में पैसों का अभाव या प्रभाव दोनो भी नहीं है। हमारे देश को स्वतंत्रता मिलकर 70 साल होने को आए, फिर भी हम आर्थिक रूप से स्वावलंबी नही हुए। आर्थिक स्वावलंबन, समानता हमें सहकारिता के द्वारा ही प्राप्त होगी, इस बात पर उन्होंने जोर दिया।

सहकारी संस्थाओं में महिलाओं का योगदान पुरुषों से भी ज्यादा है, ऐसा बताकर भालचंद्र कुलकर्णी जी ने कहा कि, सहकारिता समाज को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन मीडिया अपने प्रभावी माध्यम से सहकारिता का नकारात्मक रूप चित्रित करने के कारण आज आम आदमी सहकारी संस्था की तरफ साशंकता से, अलग नजरिये से देखने लगा है। ऐसी स्थिति में संस्कारित सहकारी कार्यकर्ताओं ने लोगों को वास्तव स्थिति बताकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और हर एक ने सत्य परखकर अपने विचार बनाने चाहिए। सहकार सुगंध द्वारा यही प्रयास हम कर रहे हैं, ऐसा कुलकर्णी जी ने कहा।

आशाताई देशपांडे जी ने महिलाओं के संगठन, संस्कारों का महत्व, कौशल्य विकास की आवश्यकता पर सविस्तर विवेचन किया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती भारती भट जी के सहकार गीत से हुई। श्री. गोरे जी ने उपस्थितों का स्वागत किया। अपने प्रास्ताविक में श्री खटावकर जी ने संगोष्ठी के आयोजन का हेतु स्पष्ट किया। श्री वळसंगकर जी ने आभार प्रकट किए। श्रीमती स्मिता वळसंगकर जी ने सूत्रसंचालन किया और श्रीमती केतकी कुलकर्णी जी के पसायदान गायन से संगोष्ठी का समापन हुआ।

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