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भोपाल : 11 जनवरी 2020 को सहकार भारती के 41 वें स्थापना दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित कार्यालय में नागरिकता संशोधन कानून पर व्याख्यान आयोेजित किया गया। जिसमें अध्यक्षता सहकार भारती के प्रदेशाध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने की एवं वक्ता के रूप में लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यभारत प्रांत के सह संघचालक अशोक जी पांडेय रहे। शुभारंभ में भारत माता और सहकार भारती के प्रणेता लक्ष्मणराव इनामदार जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर श्री विवेक चतुर्वेदी ने सहकार भारती की स्थापना और आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सहकारिता की पृष्ठ भूमि सबके सामने रखते हुये कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही सहकारिता रही है।

सहकारिता हमारे कार्य, विचार, दर्शन, घर, परिवार, समाज में आदि अनादि काल से है। हमें सहकारिता को जीवंत बनाने की आवश्यकता है, मेरा नही तेरा का भाव भारत में सदा से रहा है और यही सहकारिता है। तेरा का भाव जागृत होता है तो अमूल, इफको, कृभको, जैसी संस्थाएं खड़ी हो जाती है। सहकार ठीक करना है तो संस्कारित लोगों को लेकर आगे बढ़ना होगा। नागरिकता संशोधन कानून पर बोलते हुये अशोक पांडेय ने कहा कि यह कानून किसी की नागरिकता लेने के लिये नही बल्कि देने के लिये है, जो अल्पसंख्यक धार्मिक रूप से प्रताडित हुये हैं, उन्हें नागरिकता देने का है। पाकिस्तान, बांग्ला देश, अफगानिस्तान में 6 धर्मों के अल्पसंख्यक जिनमें हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, इसाई और पारसी हैं, जो वहां अत्याचार सहते आ रहे हैं जिनकी संख्या भी बहुत कम हो गई या तो धर्मान्तरित किया गया या मारा गया। ऐसे शरणार्थी जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गये हैं उन्हें नागरिकता प्रदान की जायेगी। केन्द्र सरकार ने बदलाव करते हुये 11 वर्ष की समय सीमा को अब 5 वर्ष कर दिया है। आजादी के समय अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिये जो समझौता हुआ था, भारत तो आज भी पालन कर रहा है लेेकिन पाकिस्तान नहीं। आज भारत में 2 करोड से ज्यादा बांगला देशीयों घुसपेठियों का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान में हिन्दू 11 प्रतिशत थे, जो घटकर मात्र 2 प्रतिशत बचे। वहीं बांगला देश में हिन्दू 24 प्रतिशत थे जो अब 8 प्रतिशत ही बचे। और अफगानिस्तान में केवल 7 हजार हिन्दू-सिख ही बचे हैं। आखिर ये कहां गये। गांधी जी भी कहते थे कि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू और सिख हर नजरिये से भारत आ सकते हैं। अगर वो वहां नहीं रहना चाहते, तब उन्हें नौकरी देना, उनके जीवन को सामान्य बनाना भारत सरकार का पहला कर्तव्य है और इसी कार्य को नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं आज वही विपक्षी इसका विरोध कर रहे जो गांधी जी को आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी और देश तोड़ने वाले इस कानून पर भ्रम फैलाकर देश मे आग लगाने की कोशिश कर रहे है।

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