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व्यक्ति निर्माण संगठन का मुख्य आधार – श्रीवर्द्धन

उदयपुर 02 जनवरी 2017: “किसी संगठन का मजबूत आधार व्यक्ति निर्माण होता है। किसी संगठन का कार्यकर्ता रामायण के हनुमान जैसा होना चाहिये जो न केवल विद्यावान और गुणी हो  अधिक चतुर भी हो, साथ ही व्यक्तिगत स्वार्थ न हो“ उपरोक्त कथन के साथ किसान भवन में आयोजित उदयपुर जिला सहकार भारती की जिला बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पश्‍चिम भारत के क्षेत्रीय प्रचारक माननीय श्रीवर्द्धन जी ने संबोधन करते हुए कहा कि कार्यकर्ता के लिये दायित्व का निवर्हन प्रमुख उद्देश्य होता है। इस प्रकार संगठन में “साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा“ वाली गीत की पंक्ति को चरितार्थ करना है। कार्यकर्ताओं की श्रृंखला तैयार करते हुए टोली का स्वरूप देना। पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करना, कार्यकर्ता के लिये त्याग की भावना सर्वोपरी होता है, समस्त कार्य संगठन हित में सर्वोपरी हो। माननीय श्रीवर्द्धनजी ने कहा कि सभी कार्यकर्ता लम्बे समय में लक्ष्य बनाकर प्रत्येक विकास खण्ड एवं प्रत्येक गांव तक अपनी पहुंच बनाए। इन कार्यकर्ताओं की सहकारिता की तकनीक समझाकर प्रभावी एवं प्रखर बनाएं। स्थानीय संसाधन आधारित सहकारिताएं गठित करें तथा शहरी क्षेत्र में समाज उपयोगी प्रकल्प गठित करें, ताकि समाज को लाभ मिल सके। शोषणमुक्त, समतायुक्त वातावरण निर्मित हो।

सहकारी भारती के संस्थापक स्व. लक्ष्मणराव ईनामदार की जन्मशताब्दी समारोह के कार्यक्रमों के तहत श्रेष्ठ कार्यों का निवर्हन करने का आह्वान करते हुए श्रीवर्द्धनजी ने कहा कि मैने व्यक्तिगत रूप से स्वर्गीय ईनामदारजी को देखा, उनकी सादगी एवं कार्यशैली प्रेरणादायी मार्ग प्रशस्त करती है। बैठक में प्रारम्भ में सहकार भारती के जिलाध्यक्ष राजेश चित्तौड़ा ने स्वागत भाषण, संगठन मंत्री किरण नागौरी ने बैठक का उद्देश्य एवं महामंत्री गोपाल पालीवाल ने संगठनात्मक वृत प्रस्तुत किया।

बैठक के प्रारम्भ में सहकार भारती के ग्रामीण सहकारिता प्रदेश प्रमुख प्रमोद सामर ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि संगठन को प्रत्येक ग्राम पंचायत तक सुदृढ़ करना है और संगठन में निष्ठावान, समर्पित, सुचितावान व्यक्तियों को जिसमें कृषक, महिलाएं, मजदूर, समस्त वर्ग को जोड़ना है, जिन्हें सहकारिता के नये आयामों में, नई सहकारिताओं का गठन एवं शैक्षणिक एवं कृषक वर्ग में अधिक प्रचार एवं प्रसार करना है।

बैठक को संबोधित करते हुए सहकार भारती चित्तौड़ प्रान्त के अध्यक्ष शांतिलाल शर्मा ने आह्वान किया कि प्रत्येक क्षेत्र, वर्ग में सहकारिता को नवीनतम तकनीकी से जोड़ते हुए योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु सहकार भारती सेतु का कार्य करे एवं सदस्यता अभियान को प्रभावी बनाते हुए इसे जनआन्दोलन बनाना है। शर्मा ने कहा कि सहकारिता के सिद्धान्त, अधिनियम, नियम-उपनियम की सीमाओं में अपने उद्देश्य की पूर्ति कर संस्थाओं का आर्थिक उन्नयन कराना है। सहकारी नेतृत्व को अधिक प्रभावी एवं उद्देश्यपूर्वक बनाना है। जिसमें सहकारिताएं असंगठित वर्ग में “एक सबके लिये सब एक के लिये“ सबल सहकार, समृद्ध भारत को सफल बनाना है।

राजस्थान प्रदेश के महामंत्री प्रदीप चौबीसा ने इस अवसर पर कहा कि राजस्थान में सहकार भारती उत्तरोत्तर प्रगति एवं कार्य विस्तार के साथ इस वर्ष शिक्षण-प्रशिक्षण, अभ्यास वर्ग एवं व्याख्यान मालाओं का व्यापक आयोजन करेगी। चौबीसा ने प्रदेश के सम्पूर्ण वृत से अवगत कराया।

डेयरी प्रकोष्ठ की अखिल भारतीय प्रमुखा डॉ. गीता पटेल ने दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालकों के हित में केन्द्र एवं राज्य सरकार की लाभकारी योजनाओं के अवगत कराते हुए प्रत्येक कार्यकर्ता को इसे प्रत्येक पशुपालक एवं काश्तकार तक पहुंचा कर लाभान्वित करने का आह्वान किया।

बैठक में मुख्यवक्ता माननीय श्रीवर्द्धनजी के संबोधन के पश्‍चात् सहकार भारती के ग्रामीण सहकारिता प्रदेश प्रमुख प्रमोद सामर, चित्तौड़ प्रान्त के अध्यक्ष शांतिलाल शर्मा, राजस्थान प्रदेश के महामंत्री प्रदीप चौबीसा, डेयरी प्रकोष्ठ की अखिल भारतीय प्रमुखा डॉ. गीता पटेल ने संबोधित किया।

इस अवसर पर सहकारविद् राजश्री गांधी, भूमि विकास बैंक अध्यक्ष रेवाशंकर गायरी, सीसीबी बैंक पूर्व निदेशक महेन्द्र औदिच्य, सलूम्बर केवीएसएस अध्यक्ष परमानन्द मेहता, सहकार भारती के उपाध्यक्ष डॉ. ओम साहू, दिनेश सोनी, मंत्री रामलाल पटेल, उमेश जोशी, महिला प्रकोष्ठ प्रमुख चंदा जैन, सहप्रमुख शांति दया, बैंकिंग प्रमुख आशीष कोठारी सहित विभिन्न पंचायत प्रमुखों ने भी अपने विचार प्रकट किये।

 

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